हरिद्वार में शनिश्चरा अमावस्या और वट सावित्री व्रत पर्व पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी

धर्मनगरी हरिद्वार में शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री व्रत का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।एक ओर जहां लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया, वहीं सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। पर्व के अवसर पर हरिद्वार के घाटों, मंदिरों और प्रमुख मार्गों पर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

शनिश्चरी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, कुशावर्त घाट, सुभाष घाट, भीमगौड़ा तथा अन्य गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे और बम-बम भोले के जयघोष के साथ गंगा में स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त किए गए कर्म विशेष फलदायी होते हैं। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान किया। नारायणी शिला और कुशावर्त घाट पर पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने पिंडदान, तर्पण और नारायण बलि जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। पंडितों और पुरोहितों के मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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