लोक आस्था के महापर्व छठ का मंगलवार को समापन हो गया। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पिछले तीन दिनों से मनाया जा रहा छठ पर्व सम्पन्न हो गया। ऊषा अर्घ्य प्रदान करने के साथ ही छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास भी खत्म हो गया।
बताते चलें कि चार दिवसीय यह पर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था। मंगलवार को 28 अक्टूबर को संपन्न हो गया। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद व्रती घर लौटकर श्रद्धापूर्वक व्रत का पारण किया। वरिष्ठ समाजसेवी रंजीता झा ने कहा कि 36 घंटे के निर्जला उपवास के बाद यह क्षण भक्ति और संतोष से भरा होता है। परंपरा के अनुसार, व्रत का पारण कच्चे दूध का शरबत, ठेकुआ या गुड़-चावल की खीर खाकर करती है। वहीं कुछ महिलाएं पूजा स्थल पर दीप जलाकर छठी मईया का आभार प्रकट करती हैं और फिर परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करती हैं।पारण के दौरान ठेकुआ, कसरी, खीर, फलाहार और तुलसी जल का विशेष महत्व होता है। सबसे पहले व्रती तुलसी के पत्ते से जल ग्रहण करते हैं और फिर छठी मईया को प्रणाम कर प्रसाद खाकर व्रत तोड़ती हैं।

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