हरिद्वार जिला प्रशासन ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न के मामलों में पात्र पीड़ितों को एक सप्ताह के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि सहायता राशि के भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए और इसके लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
डॉ. मिश्र ने गुरुवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के मामलों में सहायता राशि वितरण की समीक्षा की।उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करते समय ही पीड़ित का जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, आधार से जुड़े बैंक खाते की पासबुक की छायाप्रति और मोबाइल नंबर प्राप्त कर समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराया जाए। इससे पात्र पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता देने में मदद मिलेगी।बैठक में उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम के लिए संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने और वहां पुलिस और समिति सदस्यों के सुझावों के आधार पर प्रभावी कदम उठाने पर भी चर्चा हुई।

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