हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य द्विशताब्दी समारोह का आयोजन हुआ

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को प्रेस क्लब हरिद्वार सभागार में भव्य द्विशताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय आर्थिक उदारीकरण बनाम बाजारीकरण के दौर में पत्रकारिता रखा गया, जिसमें बदलते मीडिया परिदृश्य, पत्रकारिता के मूल्यों और डिजिटल युग की चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विशिष्ट अतिथि आचार्य बालकृष्ण और मुख्य वक्ता प्रियंका शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और मीडिया से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में डॉ. निशंक ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि 200 वर्षों की यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की मिसाल है। उन्होंने कहा कि हिंदी आज विश्व की प्रभावशाली भाषाओं में शामिल है और हिंदी अखबारों के पाठकों की संख्या आज भी सबसे अधिक है। अपने शुरुआती पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ‘सीमांत वार्ता’ नाम से दैनिक अखबार की शुरुआत कर कड़ी मेहनत से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया।उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया के करीब 250 विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन कराया जा रहा है। उनके अनुसार, पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है।

विशिष्ट अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य को सामने लाना और समाज को सही दिशा देना है। उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान समय में पत्रकारों को निष्पक्षता और जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।

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