हरिद्वार जनपद में अनियमिताओं के चलते 23 मदरसो पर कार्यवाही की गई

हरिद्वार जिले में मदरसों में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. के निर्देश पर 23 मदरसों की सरकारी सहायता राशि तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है.वहीं निगरानी और जांच के दायरे में आने के बाद 10 मदरसा संचालकों ने अपने संस्थानों को बंद करने का नोटिस भी दे दिया है, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है.

प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक जांच में कई मदरसों में वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं. खासतौर पर लक्सर क्षेत्र के सुल्तान इलाके में संचालित छह मदरसों के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच की गई, जिसमें अनियमितताएं पाई गईं. यह शिकायत स्थानीय विधायक की ओर से की गई थी. जांच के बाद इन मदरसों समेत कुल 23 संस्थानों की सरकारी सहायता राशि रोक दी गई.दरअसल, सरकार की ओर से मदरसों को भी मिड-डे मील सहित विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है. लेकिन हाल के दिनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री स्तर से जांच के निर्देश दिए गए थे. इसी क्रम में जिलाधिकारी के निर्देश पर 19 अप्रैल को मदरसों की मॉनिटरिंग के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था.मदरसों के संचालकों को निर्देश दिए गए थे कि वे रोजाना बच्चों की उपस्थिति और मिड-डे मील से संबंधित फोटो इस ग्रुप में साझा करेंगे. हालांकि, दस दिन तक चली इस निगरानी प्रक्रिया में कई मदरसों ने नियमों का पालन नहीं किया. चार मदरसों की ओर से कोई रिपोर्ट ही प्रस्तुत नहीं की गई, जबकि तीन अन्य मदरसों ने वित्तीय वर्ष के दौरान योजनाओं से संबंधित डाटा उपलब्ध नहीं कराया.

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 14 मदरसों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. इनमें से दस मदरसों ने प्रशासन की सख्ती के बाद बंदी का नोटिस दिया है, जबकि चार मदरसों ने मॉनिटरिंग के दौरान कोई जानकारी साझा नहीं की. प्रशासन को आशंका है कि इन संस्थानों में सरकारी सहायता राशि का दुरुपयोग या फर्जीवाड़ा किया गया हो सकता है.मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया है. इस समिति में जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा), जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी और संबंधित उपजिलाधिकारी या तहसीलदार को शामिल किया गया है. समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संदिग्ध मदरसों की गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

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