उत्तराखंड की विधानसभा में सबसे अधिक 11 सीटें हरिद्वार जिले से आती हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने इनमें आठ सीट जीतीं, तब कांग्रेस केवल तीन सीटों पर ही चुनाव जीत सकी।इस बार कांग्रेस में आठ और भाजपा में पांच सीटों पर टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है। भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य राजैनतिक पार्टियों में टिकट के लिए दावेदारों की सूची भी लंबी होती जा रही है।
भाजपा : 2017 के विधान सभा चुनाव में 11 में से 8 सीटें झटकने वाली भाजपा को इस बार कुछ सीटों पर भितरघात की आशंका है। रानीपुर, ज्वालापुर, हरिद्वार नगर सीट पर दावेदार बागी तेवर दिखाने लगे हैं। नगर सीट पर पूर्व मेयर मनोज गर्ग की दावेदारी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के लिए चुनौती बनी हुई है। रुड़की सीट पर सिटिंग विधायक प्रदीप बत्रा के सामने चौदह लोगों ने दावेदारी की है। झबरेड़ा सीट पर मौजूदा विधायक देशराज कर्णवाल को खुली चुनौती दी जा रही है। मंगलौर, भगवानपुर और कलियर सीट भाजपा कभी नहीं जीत पाई। यहां पार्टी के सामने जिताऊ चेहरा तलाशने की चुनौती है।
कांग्रेस :हरिद्वार नगर सीट पर बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी का विवाद चल रहा है। रानीपुर, ग्रामीण व ज्वालापुर में दावेदारों की लंबी सूची बगावत का कारण बन सकती है। चारों विधानसभा सीटों में दावेदार हरीश रावत व प्रीतम गुट में बंटे हुए हैं। यहां भितरघात का सामना करना पड़ सकता है। मंगलौर, भगवानपुर और कलियर सीट 2017 में कांग्रेस ने जीती थी, इस बार भी यहां टिकट बंटवारे को लेकर ज्यादा घमासान नहीं है। खानपुर सीट पर पूर्व सीएम हरीश रावत के पुत्र वीरेंद्र रावत का भी दावा है। उनकी पुत्री अनुपमा रावत लक्सर और खानपुर दोनों सीटों पर सक्रिय हैं। जातीय समीकरण साधना भी कांग्रेस के लिए चुनौती है।

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