प्रदेश में मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद जिले में आवेदन प्रक्रिया तेज हुई

त्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद हरिद्वार जिले में मदरसों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के करीब 250 संचालित मदरसों में से अब तक 26 ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता के लिए आवेदन किया है।विभाग का कहना है कि सभी मदरसों को निर्धारित मानकों के अनुरूप मान्यता लेना अनिवार्य होगा। जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी बेसिक अमित कुमार चंद ने बताया कि मदरसों को अब निजी विद्यालयों की तर्ज पर भवन, आधारभूत सुविधाएं, शिक्षण व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर मान्यता दी जाएगी।

आवेदन लगातार प्राप्त हो रहे हैं और उनकी जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल आवेदन की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई है, लेकिन विभाग चाहता है कि सभी मदरसे जल्द आवेदन कर प्रक्रिया पूरी करें। राज्य सरकार ने एक जुलाई से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू करते हुए मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया है। इसके तहत प्रदेश के सभी 452 मदरसों को अब प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। इनमें लगभग 400 मदरसे कक्षा एक से आठ तक और 52 मदरसे कक्षा नौ से 12 तक संचालित हैं। हाल ही में शासन के निर्देश पर हरिद्वार जिले के 131 मदरसों की जांच कराई गई थी। जांच में 23 मदरसों में विभिन्न अनियमितताएं मिली थीं। इनमें से 11 मदरसों की पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना की धनराशि पर रोक लगा दी गई थी। जिले में 131 मदरसे पूर्व में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत थे, जबकि अन्य स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहे हैं। अब बोर्ड भंग होने के बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण कराना होगा।विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ मदरसों के सामने मान्यता प्राप्त करने की चुनौती भी है। कई संस्थानों के पास अपनी भूमि नहीं है और वे मदरसा बोर्ड की संपत्तियों पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे मदरसों को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही मान्यता मिल सकेगी।

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