जब भी हम कहीं और किसी शहर में घूमने जाते हैं तो ऑटो चालक, विक्रम चालक, कैब वाला… सब अपने मन से रुपये वसूलते हैं. ऐसा ही कुछ धर्मनगरी हरिद्वार में भी हो रहा था. विक्रम चालक को लगा था कि उनकी करतूत किसी के सामने नहीं आएगी.मगर, उन्हें यह नहीं पता था कि जिन यात्रियों से वह मुंह खोलकर रुपये मांग रहे हैं वो कोई आम लोग नहीं थे. जैसे ही 3 किलोमीटर की दूरी के लिए 300 रुपये किराया मांगा, वैसे ही विक्रम जब्त हो गया.
दरअसल, लगातार शिकायतें मिल रही थी कि हरिद्वार में बाहर से आने वाले यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है. किराया वसूलने में ऑटो, विक्रम और बैटरी रिक्शा की बात आने आई. शिकायतों का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा के नेतृत्व में ऑटो और विक्रमों के किराए की औचक जांच की गई.अधिकारियों ने सच जानने के लिए फिल्मी स्टाइल में आम लोगों की तरह सफर करने का फैसला लिया. हरिद्वार के एआरटीओ निखिल शर्मा आम यात्री बनकर पहुंचे और कई वाहनों में सफर किया. रानीपुर मोड़ से रेलवे स्टेशन तक करीब तीन किलोमीटर की दूरी के लिए विक्रम चालक ने 300 रुपये किराया मांगा. जबकि, इस रूट का निर्धारित किराया 50 रुपये है. जब अधिकारी ने कहा कि सिर्फ 3 किमी के लिए 300 ज्यादा नहीं हैं.. इस पर चालक कहता है- है तो… अधिकारी कहता है कि तो क्या ज्यादा ही लोगे. फिर क्या था अधिकारी ने हाथोंहाथ एक्शन ले लिया. दो विक्रमों को जब्त कर लिया.
अब कार्यालय में दोनों वाहन खड़े कर चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है. वहीं, कार्रवाई के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने कुल 105 चालान किए और 25 वाहनों को जब्त किया. जिसमें एक ई रिक्शा ओवरलोडिंग और दो ई रिक्शा बिना पंजीकरण चलते मिले. इन्हें भी जब्त कर लिया गया.

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